क्या चिन्मयानंद का ‘संत या सन्यासी या स्वामी ’ पद भी अब जाने वाला है ?

आपको पढ़ने या सुनने में अजीब भले लग रहा हो परन्तु यह सच है कि अब चिन्मयानंद के नाम के आगे लगने वाला ‘संत या सन्यासी’ जैसा शब्द नहीं लगेगा  |  एक कहावत जो प्राचीन समय से ही चली आ रही है लगता है अब वही कहावत चिन्मयानन्द के ऊपर भी चरितार्थ होने जा रही है | कहावत है कि ‘जब इन्सान घोर संकट या विपत्ति में होता है तब उस आदमी का साया भी उसका साथ छोड़ देता है |’

हुआ यह है कि जब से चिन्मयानंद यौन उत्पीड़न मामले में गिरफ्तार किए गए हैं तब से उनके संगी साथी भी अब उनका साथ धीरे –धीरे छोड़ते जा रहे हैं | साथ छोड़ने वालों में इस बार ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’ है | अब ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’ ने भी चिन्मयानन्द को संत समुदाय से बाहर करने का फैसला किया है | यही ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’ ही संतों के बारे में निर्णय लेता है |

वैसे इस मामले की औपचारिक घोषणा हरिद्वार में 10 अक्टूबर को होने वाले महागठबंधन की बैठक में किया जायेगा | जबकि ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’ के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी ने बताया कि इस मामले सम्बंधित निर्णय शनिवार को ही ले लिया गया है | नरेन्द्र गिरी ने यह भी कहा है कि चूँकि चिन्मयानंद ने स्वयं अपने कुकर्मों को स्वीकार किया है | इसलिए जब तक वह अदालत से निर्दोष साबित नहीं हो जाते हैं तब तक वे इससे बाहर रहेंगे |

चिन्मयानंद से संत या सन्यासी शब्द तो हटेगा ही साथ में अब उनको ‘महानिर्वाणी अखाड़े’ के ‘महामंडलेश्वर’ के पद से भी हाथ धोना पड़ेगा |

आपको जानकारी के लिए बता दें कि चिन्मयानंद की मुश्किल उस समय शुरू हो गई थी कि जब 24 अगस्त को इनके ही महाविद्यालय में पढ़ने वाली एलएलएम की एक छात्रा ने एक वीडिओ जारी या वायरल करके इनके ऊपर यौन शोषण एवं कई अन्य आरोप लगाए थे |

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